आओ मनाए #नये_साल_को
नये साल को आप किस प्रकार मनाते हो, शायद आपका उत्तर होगा जश्न मानकर लेकीन इस नए वर्ष को कुछ खास तरीके के साथ मनाए । हमने अपनी सोच बदल कर जैसे हम अश्लील मूर्तियाँ देखते हैं तो अश्लीलता उत्पन्न होती है क्योंकि उस उत्तेजक मूर्ति ने अंदर चिंगारी लगा दी, पैट्रोल सुलगने लगा। ऐसी तस्वीरों को तिलांजलि दे दें। जैसे हम देशभक्तों की जीवनी पढ़ते हैं और मूर्ति देखते हैं तो हमारे अंदर देशभक्ति की प्रेरणा होती है। ऐसी तस्वीर घर में हों तो कोई हानि नहीं। यदि हम साधु-संत-फकीरों तथा अच्छे चरित्रावान नागरिकों की जीवनी पढ़ते-सुनते हैं तो सर्व दोष शांत होकर हम अच्छे नागरिक बनने का विचार करते हैं। इसलिए हमें संत तथा सत्संग की अति आवश्यकता है जहाँ अच्छे विचार बताए जाते हैं। हम अपनी छोटी-सी बेटी को स्नान कराते हैं, वस्त्रा पहनाते हैं। इस प्रकार सब करते हैं। वही बेटी विवाह के पश्चात् ससुराल जाती है। अन्य की बेटी हमारे घर पर बहू बनकर आती है। अब नया क्या हो गया? यह शुद्ध विचार से विचारने की बात है। इस प्रकार विवेक करने से खानाबदोश विचार नष्ट हो ...